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क्रिकेट खेलने से पहले पढ़ें नियमों का यह 2026 ब्योरा

क्रिकेट खेलने से पहले पढ़ें नियमों का यह 2026 ब्योरा

क्रिकेट के नियम हिंदी में समझने का सबसे सीधा रास्ता यह है: पूरा खेल MCC के 42 कानूनों से चलता है, जिन्हें दुनिया भर में ICC अपने फ़ॉर्मेट के हिसाब से ढालता है। टेस्ट में पाँच दिन, वनडे में 50 ओवर और T...

5 अक्टूबर 2026

क्रिकेट खेलने से पहले पढ़ें नियमों का यह 2026 ब्योरा

क्रिकेट के नियम हिंदी में समझने का सबसे सीधा रास्ता यह है: पूरा खेल MCC के 42 कानूनों से चलता है, जिन्हें दुनिया भर में ICC अपने फ़ॉर्मेट के हिसाब से ढालता है। टेस्ट में पाँच दिन, वनडे में 50 ओवर और T20 में 20 ओवर मिलते हैं, और हर ओवर में छह वैध गेंदें होती हैं। बल्लेबाज़ नौ तरीक़ों से आउट हो सकता है, जिनमें बोल्ड, कैच, LBW और रन आउट सबसे आम हैं। T20 में पहले 6 ओवर पावरप्ले के होते हैं, जहाँ घेरे के बाहर केवल 2 क्षेत्ररक्षक रह सकते हैं। फ्रंट-फुट नो-बॉल पर अगली गेंद फ्री हिट होती है, जिसमें बोल्ड, कैच और LBW से आउट नहीं दिया जाता। IPL समाचार की सलाह साफ़ है: गली-मोहल्ले का टूर्नामेंट हो या स्टेडियम, खेलने से पहले आयोजक के लिखित नियम माँगिए, क्योंकि स्थानीय नियम अक्सर आधिकारिक कानूनों से अलग होते हैं।

ज़्यादातर लोग मानते हैं कि क्रिकेट का नियम एक ही होता है और जो टीवी पर दिखता है, वही हर मैदान पर चलता है। यह सबसे महँगी ग़लतफ़हमी है। मैंने बरसों गली से लेकर क्लब तक खेला है और हर बार किसी न किसी "आधिकारिक" नियम की वजह से बहस होते देखी है। एक मैच में 9 खिलाड़ी थे, 8 ओवर की पारी थी और पहली-आख़िरी गेंद पर बने रन दोगुने गिने गए। टीवी वाला खेल इसमें से कुछ भी नहीं मानता। इसलिए पहले यह समझिए कि नियम तीन परतों में बँटे हैं: कानून, फ़ॉर्मेट की शर्तें और आयोजक की मर्ज़ी। जो इन तीनों को अलग-अलग नहीं पहचानता, वह हर विवाद में हारता है। इस लेख में हम तीनों परतों को बारी-बारी खोलेंगे, ताकि अगली बार मैदान पर आपको किसी की "आख़िरी राय" पर निर्भर न रहना पड़े।

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निचोड़ क्या है?

निचोड़ यह है कि क्रिकेट में सब कुछ तीन चीज़ों पर टिका है: ओवर कितने हैं, आउट कैसे होते हैं और रन कैसे गिने जाते हैं। MCC के 42 कानून ढाँचा देते हैं, ICC फ़ॉर्मेट की शर्तें जोड़ता है, और आपका स्थानीय आयोजक बाक़ी सब बदल देता है।

यह बात किसी को पसंद नहीं आती, पर सच यही है। Laws of Cricket का मूल मसौदा MCC यानी मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के पास है और वही समय-समय पर संशोधन छापता है। ICC उसी ढाँचे पर अंतरराष्ट्रीय मैचों की "प्लेइंग कंडीशंस" बनाता है, जैसे ओवर की संख्या, पावरप्ले और रिव्यू की गिनती। उसके बाद आते हैं स्थानीय टूर्नामेंट, जो अपनी सुविधा से कुछ भी जोड़ या घटा देते हैं। हिंदी विकिपीडिया के "क्रिकेट के नियम" पन्ने पर ख़ुद चेतावनी लगी है कि "इस लेख में सन्दर्भ या स्रोत नहीं दिया गया है", यानी जिस पन्ने से लोग नियम सीखने जाते हैं, वही सबूत माँग रहा है। और स्कैन की हुई एक टूर्नामेंट PDF में तो हर मैच 16 ओवर का, हर टीम में 9 खिलाड़ी, और पारी की पहली-आख़िरी गेंद के रन दोगुने लिखे थे। ऐसा नियम किसी किताब में नहीं मिलेगा। फ़ैसला: जिस परत का नियम आपके सामने है, पहले उसे पहचानिए, फिर बहस कीजिए।

मैदान पर खिलाड़ी असल में क्या देखते हैं?

मैदान पर खिलाड़ी तीन चीज़ें देखते हैं: अंपायर की उँगली या हाथ का इशारा, स्कोरबोर्ड का स्कोर-विकेट-ओवर और ज़रूरत पड़ने पर थर्ड अंपायर की स्क्रीन। बाक़ी सारी किताबी बातें इन्हीं तीन फ़ैसलों में सिमट जाती हैं।

असल खेल में नियम किताब से नहीं, इशारों से चलता है। ESPN के स्कोरकार्ड पर Afghanistan A बनाम India A के दूसरे मैच का एक पल दर्ज है: Prabhsimran Singh 84 रन पर ऑफ़-स्पिन गेंद को पैडल-स्कूप करने गए, गेंद ने हल्का-सा छुआ और विकेटकीपर ने कैच पकड़ लिया। अपील हुई, अंपायर की उँगली "काफ़ी जल्दी" उठी और स्कोर 167/3 हो गया। देखिए, किसी ने नियम की किताब नहीं खोली, अंपायर का एक फ़ैसला ही अंतिम था। ऊपर जिस स्थानीय PDF का ज़िक्र हुआ, उसमें भी लिखा है कि वाइड, नो-बॉल और आउट के सारे फ़ैसले अंपायर देगा और वही अंतिम होगा, वहाँ DRS नहीं रहेगा। यानी बड़े स्टेडियम और गली में फ़र्क़ तकनीक का है, सिद्धांत का नहीं। खिलाड़ी जो देखता है, वह यह है: उँगली उठी तो पवेलियन, नहीं उठी तो खेल जारी। रिव्यू की सुविधा हो तो वह भी गिनती की मिलती है।

अंपायर के हर इशारे का मतलब ठीक से जानना हो, तो हमारे [Internal Link: क्रिकेट अंपायर के इशारे और संकेतों की पूरी गाइड] पर नज़र डालिए।

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कौन सी 3 बातें सबसे ज़्यादा मायने रखती हैं?

सबसे ज़्यादा मायने रखती हैं ओवर और पावरप्ले की गिनती, नो-बॉल, वाइड और फ्री हिट की सज़ा, और आउट होने के तरीक़े साथ में रिव्यू की सीमा। इन तीनों में चूक हुई तो रन, विकेट और पूरा नतीजा बदल जाता है।

  1. ओवर और पावरप्ले। टेस्ट पाँच दिन चलता है, वनडे में 50 ओवर मिलते हैं और T20 में 20। T20 के पहले 6 ओवर पावरप्ले हैं, जिनमें घेरे के बाहर अधिकतम 2 क्षेत्ररक्षक रहते हैं। बाद के ओवरों में यह संख्या 5 हो जाती है। यही कारण है कि शुरुआती छह ओवर में रन तेज़ बनते हैं और बल्लेबाज़ हवा में शॉट खेलने से डरते नहीं।
  2. नो-बॉल, वाइड और फ्री हिट। फ्रंट-फुट नो-बॉल पर एक अतिरिक्त रन मिलता है और अगली गेंद फ्री हिट होती है। फ्री हिट पर बल्लेबाज़ रन आउट हो सकता है, बाक़ी ज़्यादातर तरीक़ों से बच जाता है। वाइड पर भी अतिरिक्त रन जुड़ता है और वह गेंद दोबारा फेंकी जाती है। गेंदबाज़ की एक ग़लती टीम को दो-दो रन महँगी पड़ती है।
  3. आउट होना और रिव्यू। बोल्ड, कैच, LBW, रन आउट, स्टंप्ड और हिट विकेट सबसे आम हैं। DRS में हर टीम को सीमित रिव्यू मिलते हैं, और "अंपायर्स कॉल" पर फ़ैसला मैदानी अंपायर का ही रहता है। IPL में वाइड और नो-बॉल पर भी रिव्यू लिया जा सकता है, जो पहले संभव नहीं था।

इन तीनों में सबसे ज़्यादा विवाद दूसरे में होता है, क्योंकि फ्री हिट का नियम सुनने में आसान और लागू करने में उलझा हुआ है। पहला रन-आउट वाला अपवाद देखिए: बहुत से नए खिलाड़ी मानते हैं कि फ्री हिट पर कोई आउट नहीं हो सकता। ग़लत। ऊपर जिस 16 ओवर वाले स्थानीय टूर्नामेंट का नियम-पत्र है, उसमें भी साफ़ लिखा है कि नो-बॉल या फ्री हिट पर बल्लेबाज़ रन आउट हुआ तो उसे आउट ही दिया जाएगा। यह नियम आधिकारिक कानून से मेल खाता है, इसलिए यहाँ किताब और गली एक ही बात कहती हैं, और ऐसा बहुत कम होता है।

फ्री हिट, वाइड और अतिरिक्त रन का पूरा गणित चाहिए तो [Internal Link: क्रिकेट में एक्स्ट्रा रन और नो-बॉल के नियम विस्तार से] पढ़िए।

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किन अपवादों और पेचों में लोग सबसे ज़्यादा फँसते हैं?

सबसे ज़्यादा लोग चार जगह फँसते हैं: नॉन-स्ट्राइकर रन आउट, देर से उतरने पर "टाइम्ड आउट", विकेटकीपर के पीछे गिरी हेलमेट के पेनल्टी रन, और स्थानीय टूर्नामेंट के बदले हुए नियम। इनमें से कोई भी किसी शुरुआती गाइड में ढंग से नहीं मिलता।

पहला पेच: नॉन-स्ट्राइकर छोर पर गेंद छूटने से पहले क्रीज़ छोड़ने वाले बल्लेबाज़ को रन आउट देना अब कानून के तहत वैध है। MCC ने 2022 में इसे "अनुचित खेल" की श्रेणी से हटाकर रन आउट वाले खंड में डाल दिया, और तब से "स्पिरिट ऑफ़ क्रिकेट" की दुहाई देने वाले हर बार कुछ नया बहाना ढूँढ लेते हैं। दूसरा: नया बल्लेबाज़ समय पर तैयार न हो तो उसे टाइम्ड आउट दिया जा सकता है, और T20 में यह सीमा सिर्फ़ 90 सेकंड की है। तीसरा, जो मेरी नज़र में कोई नहीं बताता: अगर गेंद विकेटकीपर के पीछे रखे हेलमेट से जा टकराए, तो बल्लेबाज़ टीम को 5 पेनल्टी रन मिलते हैं। चौथा पेच स्थानीय है, और यही सबसे ज़्यादा झगड़े की जड़ है। उस 16 ओवर वाले नियम-पत्र में छत की नेट से लगकर कैच हुआ तो आउट, सीधी बाउंड्री में गई तो 6 रन, टप्पा खाकर गई तो 4 रन, और पीछे की नेट से टकराई तो सिर्फ़ 1 रन लिखा है। साथ ही हर मैच में एक "मैजिक ओवर" भी है, जहाँ बल्लेबाज़ टीम पहले से लक्ष्य घोषित करती है, जैसे 12 रन। टीवी देखकर सीखा हुआ कोई भी खिलाड़ी इन नियमों को देखकर चकरा जाएगा।

एक और बात, ख़ासकर उनके लिए जो क्रिकेट पर पैसा लगाने के बारे में सोचते हैं। हर प्लेटफ़ॉर्म की सेटलमेंट शर्तें अपनी होती हैं, और बारिश या डकवर्थ-लुईस के बाद दाँव का क्या होगा, यह वही तय करता है, कानून की किताब नहीं। भारत में इसकी कानूनी स्थिति राज्य के हिसाब से अलग है, इसलिए पहले अपने राज्य का नियम जाँचिए। इसमें उम्र 18 से ऊपर होनी चाहिए और सीमा तय करके ही कुछ भी कीजिए।

अपवादों पर और गहराई से जाना हो तो [Internal Link: क्रिकेट में विवादित आउट और नियमों के अपवाद] देखिए।

आम खिलाड़ी के लिए चेकलिस्ट

मैच से पहले ये पाँच काम निपटा लीजिए, वरना बाद में हर बहस आपके ख़िलाफ़ जाएगी:

  • खिलाड़ियों की संख्या और अतिरिक्त खिलाड़ी की भूमिका पूछ लीजिए।
  • ओवर की संख्या और प्रति गेंदबाज़ की सीमा लिखित में देखिए।
  • छत या दीवार से टकराई गेंद के नियम पहले से तय कर लीजिए।
  • रिव्यू या DRS है या नहीं, यह सुनिश्चित कर लीजिए।
  • पहली-आख़िरी गेंद पर दोगुने रन जैसे विशेष नियम हों तो उन्हें स्कोरर को बता दीजिए।

स्कोरिंग और रन-रेट का हिसाब सीखना चाहें, तो [Internal Link: क्रिकेट स्कोरिंग सीखने की शुरुआती गाइड] भी देखिए।

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फ़ैसला

फ़ैसला सीधा है: कानून पढ़िए, फ़ॉर्मेट की शर्तें जानिए और आयोजक का नियम-पत्र हाथ में लीजिए, इसी क्रम में। मेरा तजुर्बा कहता है कि 90 फ़ीसदी झगड़े तीसरी परत की वजह से होते हैं, पहली दो की वजह से नहीं। हर बार कोई "आधिकारिक" फ़ैसला सुनाता है और असल में वह अपनी सुविधा का नियम बोल रहा होता है। IPL समाचार पर हम इसी वजह से मैच समीक्षा में यह साफ़ लिखते हैं कि कौन-सा नियम कानून का है और कौन-सा प्लेइंग कंडीशंस का। नियम जितना साफ़ होगा, उतना कम आप ठगे जाएँगे, चाहे मैदान पर हों या स्क्रीन के सामने। टेस्ट, वनडे और T20 के बीच के असली अंतर के लिए [Internal Link: टेस्ट, वनडे और T20 के नियमों में अंतर] पर जाइए, और अधिकृत पाठ के लिए MCC की आधिकारिक वेबसाइट और ICC देखिए।

अगली बार कोई "यही नियम है" कहकर बहस जीतना चाहे, तो बस पूछिए: "कौन-सी परत का?"

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q: क्रिकेट के कानून क्या होते हैं और इन्हें कौन बनाता है?

A: क्रिकेट के कानून वे 42 लिखित नियम हैं जिन्हें मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (MCC) बनाता और समय-समय पर संशोधित करता है। ICC इन्हीं के आधार पर अंतरराष्ट्रीय मैचों की प्लेइंग कंडीशंस तय करता है। इसलिए टेस्ट, वनडे और T20 के नियम कानून के ढाँचे में रहकर भी अलग-अलग दिखते हैं।

Q: एक ओवर में कितनी गेंदें होती हैं और T20 में कितने ओवर मिलते हैं?

A: एक ओवर में छह वैध गेंदें होती हैं और T20 में हर टीम को 20 ओवर मिलते हैं। नो-बॉल और वाइड गिनती में नहीं आतीं, इसलिए ओवर में कभी-कभी सात-आठ गेंदें भी फेंकनी पड़ती हैं। वनडे में 50 ओवर होते हैं, जबकि टेस्ट में ओवरों की सीमा नहीं, पाँच दिन की सीमा होती है।

Q: फ्री हिट पर बल्लेबाज़ कैसे आउट हो सकता है?

A: फ्री हिट पर बल्लेबाज़ मुख्य रूप से रन आउट हो सकता है। बोल्ड, कैच और LBW से उसे आउट नहीं दिया जाता, इसलिए वह खुलकर शॉट खेलता है। फ्री हिट केवल फ्रंट-फुट नो-बॉल के बाद की अगली गेंद पर मिलती है, हर नो-बॉल पर अपने आप नहीं।

Q: DRS और अंपायर्स कॉल में क्या अंतर है?

A: DRS खिलाड़ियों को सीमित गिनती में अंपायर के फ़ैसले को चुनौती देने देता है, जबकि अंपायर्स कॉल का मतलब है कि तकनीक के नतीजे में अनिश्चितता रही और मैदानी फ़ैसला ही कायम रहेगा। हर टीम के रिव्यू तभी घटते हैं जब फ़ैसला बदला नहीं जाता। IPL में वाइड और नो-बॉल पर भी रिव्यू लिया जा सकता है।

Q: गली क्रिकेट में नियम अलग क्यों होते हैं, और क्या करें?

A: गली क्रिकेट में नियम इसलिए अलग होते हैं क्योंकि आयोजक जगह, समय और खिलाड़ियों की संख्या के हिसाब से उन्हें बदल देते हैं। एक टूर्नामेंट में 9 खिलाड़ी, 16 ओवर और पहली-आख़िरी गेंद पर दोगुने रन तक का नियम पाया गया। समाधान सीधा है: मैच से पहले नियम लिखित में लें और दोनों कप्तानों से सहमति ले लें।

Q: क्या क्रिकेट नियम सीखने के लिए कोई ख़र्च आता है?

A: नहीं, MCC और ICC की वेबसाइटों पर कानून और प्लेइंग कंडीशंस मुफ़्त पढ़ी जा सकती हैं। हिंदी में समझने के लिए IPL समाचार जैसी कंटेंट साइटें मैच समीक्षा के साथ नियम समझाती हैं। असली ख़र्च सिर्फ़ समय का है: कुछ मैच देखिए और हर विवादित फ़ैसले को कानून से मिलाकर देखिए।

Q: अगर अंपायर का फ़ैसला ग़लत लगे तो क्या कर सकते हैं?

A: अगर रिव्यू की सुविधा है तो कप्तान निर्धारित समय में DRS माँग सकता है, वरना अंपायर का फ़ैसला अंतिम माना जाएगा। स्थानीय टूर्नामेंट में अक्सर यही लिखा होता है कि वाइड, नो-बॉल और आउट के सारे फ़ैसले अंपायर देगा। इसलिए ग़लत लगे तब भी बहस नहीं, अगली बार से नियम-पत्र में रिव्यू की माँग जुड़वाइए।

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