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क्रिकेट बैट चुनने का सच: 7 गलतियाँ

क्रिकेट बैट चुनने का सच: 7 गलतियाँ

क्रिकेट बैट चुनने का सही तरीका केवल ब्रांड या कीमत देखना नहीं है; खिलाड़ी की उम्र, लंबाई, बल्लेबाजी शैली, पिच और अभ्यास-स्तर के अनुसार बैट का आकार, वजन, हैंडल और बैलेंस मिलाना जरूरी है। भारत में कश्मी...

6 अक्टूबर 2026

क्रिकेट बैट चुनने का सच: 7 गलतियाँ

क्रिकेट बैट चुनने का सही तरीका केवल ब्रांड या कीमत देखना नहीं है; खिलाड़ी की उम्र, लंबाई, बल्लेबाजी शैली, पिच और अभ्यास-स्तर के अनुसार बैट का आकार, वजन, हैंडल और बैलेंस मिलाना जरूरी है। भारत में कश्मीर विलो बैट शुरुआती खिलाड़ियों के लिए किफायती विकल्प है, जबकि इंग्लिश विलो बेहतर प्रदर्शन और अधिक कीमत देता है। सामान्य वयस्क बल्लेबाज के लिए 2.8 से 3.0 पाउंड वजन, 6 से 8 ग्रेन और संतुलित पिकअप व्यावहारिक शुरुआती मानक हैं। एमआरएफ, एसजी, एसएस और कूकाबुरा जैसे ब्रांड अलग-अलग ब्लेड प्रोफाइल और हैंडल विकल्प देते हैं, लेकिन लोगो रन नहीं बनाता—सही फिट बनाता है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के नियमों के अनुसार बैट की अधिकतम लंबाई 38 इंच और चौड़ाई 4.25 इंच हो सकती है। खरीदने से पहले बैट को दस मिनट पकड़कर शैडो ड्राइव करें, वजन महसूस करें और हैंडल पर पकड़ जांचें।

अगर आप शुरुआती खिलाड़ी हैं: पहले सही आकार चुनें

शुरुआती खिलाड़ी के लिए क्रिकेट बैट का आकार उम्र और लंबाई से तय होना चाहिए, केवल पसंदीदा खिलाड़ी के बैट से नहीं। पाँच से छह वर्ष के बच्चों के लिए आकार 1, सात से आठ वर्ष के लिए आकार 3, नौ से दस वर्ष के लिए आकार 5 और ग्यारह से बारह वर्ष के लिए आकार 6 सामान्य विकल्प हैं। तेरह वर्ष से ऊपर या लगभग 5 फुट 7 इंच से लंबे खिलाड़ियों को सामान्य वयस्क आकार यानी पूर्ण आकार का बैट देखना चाहिए। यह वर्गीकरण एसजी और एमआरएफ जैसे भारतीय निर्माताओं के आकार-चार्ट में भी लगभग इसी तरह मिलता है, हालांकि हर मॉडल में हैंडल और ब्लेड की लंबाई थोड़ी बदल सकती है।

बैट चुनते समय उसे जमीन पर टिकाकर देखें। यदि खिलाड़ी का हाथ घुटने से काफी ऊपर रहता है, तो बैट लंबा हो सकता है; यदि बल्ले का निचला किनारा जमीन से उठता रहे, तो नियंत्रण कमजोर होगा। पहली बार खरीदने वाले अक्सर भारी बैट को “पावर बैट” समझ लेते हैं—यह वही पुराना भ्रम है जिसने कई कंधे और कलाई खराब करवाई हैं। 2.5 पाउंड का संतुलित बैट 2.9 पाउंड के सिर-भारी बैट से तेज शॉट दे सकता है, क्योंकि खिलाड़ी उसे समय पर नीचे ला पाता है। अभ्यास के लिए [आंतरिक लिंक: शुरुआती क्रिकेट तकनीक गाइड] पढ़ना भी उपयोगी रहेगा।

लंबाई और आकार की त्वरित तालिका

  • आकार 1: लगभग 4 से 5 वर्ष, 4 फुट तक।
  • आकार 3: लगभग 7 से 8 वर्ष, 4 फुट 3 इंच तक।
  • आकार 5: लगभग 9 से 10 वर्ष, 4 फुट 9 इंच तक।
  • आकार 6: लगभग 11 से 12 वर्ष, 5 फुट 2 इंच तक।
  • पूर्ण आकार: 13 वर्ष से ऊपर, सामान्यतः 5 फुट 5 इंच से अधिक।

क्रिकेट बैट की लंबाई सही होने के साथ उसका ग्रिप भी निर्णायक है। मोटा रबर ग्रिप हाथों में कंपन कम कर सकता है, पर छोटे हाथ वाले खिलाड़ी के लिए वही ग्रिप नियंत्रण बिगाड़ देगा। एसएस और कूकाबुरा के कुछ मॉडलों में ओवल हैंडल मिलता है, जबकि एसजी के कई बैट गोल या अंडाकार हैंडल के साथ आते हैं। यदि आप नेट में रोजाना 60 से अधिक गेंद खेलते हैं, तो केवल वजन नहीं, हाथ पर पड़ने वाला झटका भी जांचें। मेरी पुरानी गलती यही थी कि मैंने आकार 6 से सीधे भारी पूर्ण आकार के बैट पर छलांग लगाई; तीन सप्ताह बाद कलाई ने “आधिकारिक शिकायत” दर्ज कर दी।

अभी अपने कद और खेलने की उम्र के अनुसार विकल्प छांटें, फिर ही महंगे मॉडल देखें।

विस्तार से जानें

अगर आप पावर हिटर हैं: वजन नहीं, बैलेंस देखें

पावर हिटर के लिए सही क्रिकेट बैट वह है जिसका वजन खिलाड़ी लगातार नियंत्रित कर सके और जिसका स्वीट स्पॉट उसकी बल्लेबाजी शैली से मेल खाए। फ्रंट-फुट ड्राइव खेलने वाले खिलाड़ी निचले या मध्य स्वीट स्पॉट वाले बैट से लाभ पा सकते हैं, जबकि पुल और हुक खेलने वालों के लिए मध्य या ऊपरी स्वीट स्पॉट बेहतर हो सकता है। कूकाबुरा, एसएस, एमआरएफ और एसजी के “हाई स्वीट स्पॉट” मॉडल कठोर या उछाल वाली पिचों पर उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन धीमी भारतीय क्लब पिच पर बहुत ऊंचा स्वीट स्पॉट हर खिलाड़ी को फायदा नहीं देता।

बैलेंस को समझने का सरल तरीका है पिकअप टेस्ट। बैट को हैंडल से पकड़कर आगे-पीछे उठाइए और देखिए कि उसका सिर कितनी जल्दी नीचे आता है। सिर-भारी बैट गेंद पर अधिक द्रव्यमान पहुंचा सकता है, मगर देर से शॉट खेलने पर किनारा लगने की संभावना भी बढ़ती है। सिर-हल्का बैट कट, ड्राइव और तेज सिंगल के लिए चुस्त महसूस होता है। 2024 में प्रकाशित मैरीलैंड विश्वविद्यालय के खेल-विज्ञान शोध में उपकरण के वजन-वितरण और स्विंग नियंत्रण के संबंध पर चर्चा की गई है; सरल भाषा में, कुल वजन से अधिक मायने यह रखता है कि वजन कहां स्थित है।

बैट का वजन कैसे जांचें

  1. बैट को सामान्य बल्लेबाजी मुद्रा में पकड़ें।
  2. दस बार बिना गेंद के ड्राइव खेलें।
  3. फिर 15 बार कलाई से बैट उठाकर डिफेंस करें।
  4. यदि 25 दोहराव के बाद हाथ धीमा या कलाई तनावग्रस्त लगे, तो बैट भारी है।
  5. केवल दुकानदार के “यह प्रो मॉडल है” कहने पर निर्णय न लें।

एक उपयोगी व्यावहारिक नियम यह है कि नेट सत्र के अंतिम दस मिनट में बैट का व्यवहार जांचें। नया बैट शुरुआत में हल्का लग सकता है क्योंकि उत्साह भी मुफ्त में मिलता है; थकान के बाद असली वजन सामने आता है। मैंने कई खिलाड़ियों को 2.9 पाउंड का बैट लेते देखा, जबकि उनकी वास्तविक शॉट गति 2.6 पाउंड के संतुलित बैट से बेहतर थी। यह तुलना कम से कम 30 गेंदों के अभ्यास के बाद करें, क्योंकि पांच शैडो ड्राइव से कोई विश्वसनीय निष्कर्ष नहीं निकलता।

अच्छा बैट वह नहीं जो हाथ में “भारी और पेशेवर” लगे; अच्छा बैट वह है जिसे पारी के 30वें ओवर में भी नियंत्रित किया जा सके। अधिक बल्लेबाजी रणनीतियों के लिए [आंतरिक लिंक: उन्नत बल्लेबाजी तकनीक] देखें।

अगर आपका बजट सीमित है: विलो और ग्रेड को समझें

सीमित बजट में कश्मीर विलो सबसे व्यावहारिक विकल्प है, जबकि इंग्लिश विलो ऊंचे प्रदर्शन, हल्के पिकअप और बेहतर दानेदार लकड़ी के कारण महंगा होता है। कश्मीर विलो आम तौर पर 2,000 से 8,000 रुपये के बीच, अच्छे मध्य-स्तरीय इंग्लिश विलो 8,000 से 25,000 रुपये के बीच और शीर्ष श्रेणी के मॉडल 25,000 रुपये से ऊपर मिल सकते हैं। कीमत दुकान, ग्रेड, ब्रांड और पहले से किए गए नॉकिंग-इन कार्य पर निर्भर करती है। एसजी, एमआरएफ, एसएस और कूकाबुरा के नाम भरोसा देते हैं, मगर एक ही ब्रांड के ग्रेड 2 और ग्रेड 4 बैट के प्रदर्शन में स्पष्ट अंतर हो सकता है।

ग्रेन की संख्या अकेले गुणवत्ता का प्रमाण नहीं है। छह से आठ सीधे और समानांतर ग्रेन आकर्षक दिखते हैं, पर लकड़ी की मजबूती, नमी, प्रेसिंग और ब्लेड का आकार भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कई विक्रेता कम ग्रेन वाले बैट को “मैच ग्रेड” कहकर बेचते हैं—कागज पर दावा सुंदर है, गेंद लगने पर सच कम सुंदर। इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड के उपकरण-संबंधी नियमों में बैट के अनुमत आयाम स्पष्ट हैं, लेकिन वे हर खिलाड़ी के लिए लकड़ी का ग्रेड तय नहीं करते। इसलिए “अधिक ग्रेन = निश्चित रूप से बेहतर बैट” कहना वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं, बिक्री-पंक्ति है।

कीमत के अनुसार व्यावहारिक चुनाव

  • 2,000–5,000 रुपये: शुरुआती अभ्यास, टेनिस गेंद और स्कूल क्रिकेट।
  • 5,000–12,000 रुपये: नियमित क्लब अभ्यास के लिए कश्मीर विलो।
  • 12,000–25,000 रुपये: मध्य-स्तरीय इंग्लिश विलो या उच्च-ग्रेड कश्मीर विलो।
  • 25,000 रुपये से अधिक: प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी, विशेष प्रोफाइल और चुनी हुई लकड़ी।
  • 40,000 रुपये से अधिक: केवल तभी जब खिलाड़ी को बैट का वजन, स्वीट स्पॉट और पिकअप पहले से समझ आता हो।

एक उपेक्षित खर्च नॉकिंग-इन है। नए इंग्लिश विलो बैट को 4 से 8 घंटे की उचित नॉकिंग और किनारों की तैयारी की आवश्यकता हो सकती है; बिना तैयारी के तेज चमड़े की गेंद इस्तेमाल करने पर किनारा फट सकता है। कश्मीर विलो भी पूरी तरह “तुरंत खेलने योग्य” नहीं होता, चाहे पैकेट पर ऐसा संकेत क्यों न हो। वास्तविक मैदान में मैंने देखा है कि 6,500 रुपये का ठीक-ठाक नॉक किया हुआ बैट 18,000 रुपये के बिना तैयार बैट से अधिक भरोसेमंद निकलता है। यह वह खर्च है जिसे दुकानदार अक्सर फुटनोट में छिपा देते हैं।

सही बजट तय करने से पहले कुल लागत में ग्रिप, कवर, नॉकिंग और मरम्मत को भी जोड़ें।

जानकारी को अपने बजट से मिलाने के लिए यह अगला कदम उपयोगी रहेगा।

सही विकल्प देखें

किन आम गलतियों से बचना चाहिए?

क्रिकेट बैट खरीदते समय सबसे बड़ी गलतियां गलत वजन, बिना जांचा हुआ आकार, नकली ग्रेड और केवल विज्ञापन देखकर निर्णय लेना हैं। “प्रो खिलाड़ी इस्तेमाल करते हैं” किसी बैट के आपके लिए सही होने का प्रमाण नहीं है, क्योंकि विराट कोहली, रोहित शर्मा और शुभमन गिल की ऊंचाई, कलाई की ताकत, शॉट चयन और बैटिंग स्थिति अलग हैं। खिलाड़ी का नाम बिक्री बढ़ाता है; आपकी टाइमिंग नहीं।

खरीदने से पहले इन जोखिमों की जांच करें:

  • बैट को तराजू पर तौलें; निर्माता के दावे से 40–60 ग्राम का अंतर भी महसूस हो सकता है।
  • किनारों पर दरार, दबाव के निशान और असमान प्रेसिंग जांचें।
  • हैंडल में असामान्य कंपन हो तो बैट न लें।
  • ग्रिप फिसलती हो तो नई ग्रिप लगाकर ही निर्णय लें।
  • ऑनलाइन खरीद में वापसी नीति, वास्तविक वजन और वारंटी पढ़ें।
  • नकली एमआरएफ, एसजी या एसएस लेबल से बचने के लिए अधिकृत विक्रेता चुनें।
  • बैट पर अपना नाम या स्टिकर लगाने से पहले उसकी वापसी और वारंटी स्पष्ट करें।

एक और छिपी हुई समस्या नमी है। मानसून में बिना कवर के रखा इंग्लिश विलो फूल सकता है और किनारे नरम हो सकते हैं; वहीं अत्यधिक गर्म कमरे में लकड़ी तेजी से सूखकर दरार पकड़ सकती है। बैट को सीधे धूप, कार की डिक्की और गीले फर्श से दूर रखें। मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के नियम बताते हैं कि अनुमत बैट के आयाम सीमित हैं, पर रखरखाव की जिम्मेदारी खिलाड़ी की ही रहती है। “वारंटी है, चिंता नहीं” वाला भरोसा अक्सर पहली दरार पर समाप्त हो जाता है।

आईपीएल समाचार पर मैच समीक्षा और खिलाड़ी आंकड़ों के साथ बैटिंग रणनीतियों की चर्चा भी मिलती है, लेकिन खरीद का फैसला अपने शरीर और खेल के आधार पर करें। मशीन-निर्मित समानता के युग में भी हर विलो ब्लेड का व्यवहार थोड़ा अलग होता है। यदि संभव हो तो दुकान में तीन बैटों की तुलना करें और प्रत्येक से समान 20 शैडो शॉट खेलें। यही छोटी प्रक्रिया विज्ञापन की चमक से अधिक विश्वसनीय डेटा देती है।

30 दिन बाद बैट की जांच कैसे करें?

तीस दिन बाद बैट की जांच करने का सबसे अच्छा तरीका है उसकी सतह, किनारों, ग्रिप, हैंडल और स्वीट स्पॉट पर गेंद के निशान देखना। यदि हल्के निशान हैं, किनारे बंद हैं और हैंडल में कंपन नहीं है, तो बैट सामान्य रूप से तैयार हो रहा है। यदि 20 से 30 ओवर के भीतर गहरी दरार, ढीली ग्रिप या असामान्य कंपन दिखाई दे, तो खेल रोककर विक्रेता या बैट मरम्मत विशेषज्ञ से जांच कराएं।

पहले 30 दिनों के लिए यह रखरखाव योजना अपनाएं:

  1. पहले 4 से 6 सत्रों में केवल पुरानी या कम गति वाली चमड़े की गेंद इस्तेमाल करें।
  2. बैट को हर सत्र के बाद सूखे कपड़े से साफ करें।
  3. किनारों पर उभरी लकड़ी को काटें नहीं; मरम्मत विशेषज्ञ से दिखाएं।
  4. बैट को क्षैतिज स्थिति में सूखी जगह पर रखें।
  5. महीने में एक बार ग्रिप और हैंडल की मजबूती जांचें।
  6. बैट को लंबे समय तक बंद प्लास्टिक में न रखें, विशेषकर नम मौसम में।

डेटा-आधारित जांच के लिए अपने अभ्यास का रिकॉर्ड रखें। उदाहरण के तौर पर, 30 दिनों में 12 नेट सत्रों के बाद लिखें कि बैट कितनी बार स्वीट स्पॉट पर लगा, कितनी बार किनारा लगा और थकान के समय नियंत्रण कैसा रहा। यह नोटबुक किसी भी ऑनलाइन समीक्षा से अधिक व्यक्तिगत प्रमाण देगी। यदि बैट का औसत उपयोग 600 से 800 गेंदों के बाद भी स्थिर है, तो पिकअप और संरचना आपकी शैली से मेल खा रहे हैं। इसके विपरीत, लगातार मिस-टाइमिंग को केवल तकनीकी गलती मानना गलत होगा; उपकरण भी दोषी हो सकता है।

यहां [आंतरिक लिंक: क्रिकेट बैट रखरखाव और मरम्मत गाइड] देखना उपयोगी होगा। अंततः सही बैट का फैसला कीमत या चमक से नहीं, 30 दिनों के वास्तविक नियंत्रण, आराम और शॉट परिणाम से होता है।

अब अपने बैट की स्थिति दर्ज करें और जरूरत हो तो समय रहते ग्रिप, कवर या नॉकिंग की सेवा लें।

रखरखाव की जानकारी लें

सही क्रिकेट बैट चुनने का अंतिम निर्णय

सही क्रिकेट बैट चुनने के लिए पहले आकार, फिर वजन, फिर बैलेंस, लकड़ी, स्वीट स्पॉट और अंत में ब्रांड देखें। बच्चों के लिए लंबाई और नियंत्रण सबसे महत्वपूर्ण हैं; क्लब खिलाड़ियों के लिए टिकाऊपन और नॉकिंग-इन जरूरी हैं; प्रतिस्पर्धी बल्लेबाजों को बैट की पिकअप, ब्लेड प्रोफाइल और गेंद के प्रकार के अनुसार निर्णय लेना चाहिए। कश्मीर विलो खराब विकल्प नहीं और इंग्लिश विलो अपने-आप में जादुई समाधान नहीं—आपकी तकनीक, अभ्यास और रखरखाव परिणाम तय करते हैं।

अंतिम खरीद से पहले यह सूची जांचें:

  • क्या बैट आपकी ऊंचाई के अनुकूल है?
  • क्या आप उसे 25 से 30 शैडो शॉट तक नियंत्रित कर सकते हैं?
  • क्या वास्तविक वजन निर्माता के दावे के करीब है?
  • क्या ग्रेन, किनारे और ब्लेड में स्पष्ट दोष नहीं हैं?
  • क्या नॉकिंग-इन और वापसी नीति लिखित रूप में है?
  • क्या कुल कीमत में कवर, ग्रिप और सेवा शामिल है?

आईपीएल समाचार का उद्देश्य क्रिकेट प्रशंसकों को मैच समीक्षा, खिलाड़ी आंकड़े, बल्लेबाजी और गेंदबाजी रणनीति की दैनिक जानकारी देना है; उसी व्यावहारिक सोच से बैट खरीदिए। महंगा बैट खरीदना आसान है, सही बैट चुनना असली काम है। पहले फिट जांचें, फिर पावर; पहले नियंत्रण जांचें, फिर ब्रांड; और सबसे अंत में उस बिक्री-पंक्ति पर विश्वास करें जो कहती है कि यह बैट “हर किसी के लिए परफेक्ट” है। ऐसा बैट अभी तक किसी ने बनाया नहीं है।

अपने अगले नेट सत्र में इस जांच-सूची को साथ ले जाएं और निर्णय आंकड़ों के आधार पर लें।

अपना बैट चुनें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: क्रिकेट बैट क्या होता है और इसके मुख्य भाग कौन-से हैं?

उत्तर: क्रिकेट बैट लकड़ी का उपकरण है जिसका उपयोग गेंद को मारने के लिए किया जाता है और इसके मुख्य भाग ब्लेड, हैंडल, स्पाइन, किनारे, पैर का हिस्सा और ग्रिप हैं। ब्लेड गेंद से संपर्क करता है, जबकि हैंडल कंपन को हाथों तक पहुंचने से कम करता है। एसजी, एसएस, एमआरएफ और कूकाबुरा जैसे ब्रांड इन भागों की मोटाई और प्रोफाइल अलग-अलग रखते हैं। खरीदते समय केवल सामने की स्टिकर शीट नहीं, लकड़ी की स्थिति और हैंडल की मजबूती भी जांचें।

प्रश्न: क्रिकेट बैट कैसे चुनें?

उत्तर: क्रिकेट बैट चुनने के लिए पहले खिलाड़ी की लंबाई और उम्र के अनुसार आकार, फिर नियंत्रित वजन, बैलेंस, स्वीट स्पॉट और लकड़ी का प्रकार जांचें। दुकान में कम से कम 20 से 30 शैडो शॉट खेलें और बैट को तराजू पर तौलें। शुरुआती खिलाड़ी सामान्यतः कश्मीर विलो और संतुलित बैट से बेहतर शुरुआत करते हैं। खरीद से पहले नॉकिंग-इन, वापसी नीति और वारंटी की जानकारी लिखित रूप में लें।

प्रश्न: कश्मीर विलो और इंग्लिश विलो में क्या अंतर है?

उत्तर: कश्मीर विलो आम तौर पर सस्ता और टिकाऊ होता है, जबकि इंग्लिश विलो हल्का पिकअप, बेहतर प्रतिक्रिया और ऊंची कीमत प्रदान कर सकता है। कश्मीर विलो लगभग 2,000 से 8,000 रुपये और मध्य-स्तरीय इंग्लिश विलो लगभग 8,000 से 25,000 रुपये में मिल सकता है। वास्तविक प्रदर्शन ग्रेड, प्रेसिंग, नमी और खिलाड़ी की तकनीक पर निर्भर करता है। केवल अधिक ग्रेन देखकर इंग्लिश विलो को स्वतः बेहतर मानना सही नहीं है।

प्रश्न: क्रिकेट बैट भारी लगे तो क्या करना चाहिए?

उत्तर: यदि बैट 20 से 30 शैडो शॉट के बाद हाथ, कलाई या कंधे को थका देता है, तो हल्का या बेहतर संतुलित मॉडल चुनना चाहिए। कुल वजन घटाने के बजाय कभी-कभी सिर-भारी बैट की जगह सिर-हल्का बैट लेने से नियंत्रण सुधरता है। ग्रिप बहुत मोटी होने पर उसे बदलकर भी कुछ राहत मिल सकती है। दर्द बना रहे तो अभ्यास रोककर प्रशिक्षक या खेल-चिकित्सक से सलाह लें।

प्रश्न: क्रिकेट बैट की कीमत कितनी होती है?

उत्तर: क्रिकेट बैट की कीमत लगभग 2,000 रुपये से शुरू होकर 40,000 रुपये या उससे अधिक हो सकती है। स्कूल और टेनिस गेंद के लिए 2,000 से 5,000 रुपये, क्लब अभ्यास के लिए 5,000 से 12,000 रुपये और प्रतिस्पर्धी खिलाड़ियों के लिए 12,000 रुपये से ऊपर का बजट सामान्य है। नॉकिंग-इन, कवर, ग्रिप और मरम्मत की लागत अलग हो सकती है। महंगा बैट तभी लें जब उसका वजन और पिकअप आपके लिए पहले से उपयुक्त साबित हो।

प्रश्न: नए क्रिकेट बैट को नॉकिंग-इन क्यों करना पड़ता है?

उत्तर: नॉकिंग-इन लकड़ी की सतह और किनारों को चमड़े की तेज गेंद के प्रभाव के लिए तैयार करता है। नए इंग्लिश विलो बैट को सामान्यतः 4 से 8 घंटे की क्रमिक तैयारी की जरूरत पड़ सकती है, जबकि कश्मीर विलो को भी सीधे तेज गेंद से नहीं आजमाना चाहिए। पहले पुरानी या कम गति वाली गेंद से अभ्यास करें और किनारों पर गहरी चोट दिखे तो खेल रोक दें। बिना नॉकिंग के बैट इस्तेमाल करने से दरार और किनारे टूटने का जोखिम बढ़ता है।

प्रश्न: क्रिकेट बैट में दरार आ जाए तो क्या करें?

उत्तर: छोटी सतही दरार पर खेल तुरंत बंद करके बैट मरम्मत विशेषज्ञ से जांच कराएं। दरार को चाकू से काटना, सामान्य गोंद लगाना या टेप से स्थायी समाधान मानना गलत है। विशेषज्ञ जरूरत के अनुसार किनारे को सील, फाइबर लगाकर या स्प्लाइस की मरम्मत कर सकता है। यदि हैंडल ढीला हो, गहरी दरार ब्लेड के बीच तक पहुंची हो या कंपन अचानक बढ़ गया हो, तो प्रतिस्पर्धी खेल में उस बैट का उपयोग न करें।

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