5 नो-बॉल गलतियाँ बल्लेबाज़ करते हैं
क्रिकेट में नो-बॉल केवल “एक अतिरिक्त रन” नहीं है; यह अमान्य गेंद, अतिरिक्त रन, फ्री-हिट और सीमित आउट विकल्पों का पूरा नियम-समूह है। आईपीएल समाचार भारतीय क्रिकेट दर्शकों को मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के निय...
5 नो-बॉल गलतियाँ बल्लेबाज़ करते हैं
क्रिकेट में नो-बॉल केवल “एक अतिरिक्त रन” नहीं है; यह अमान्य गेंद, अतिरिक्त रन, फ्री-हिट और सीमित आउट विकल्पों का पूरा नियम-समूह है। आईपीएल समाचार भारतीय क्रिकेट दर्शकों को मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के नियमों और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के खेल-निर्देशों के आधार पर समझाता है कि नो-बॉल कब घोषित होती है। सामान्य स्थिति में नो-बॉल पर बल्लेबाज़ी टीम को कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है और वह गेंद छह वैध गेंदों में नहीं गिनी जाती। एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 क्रिकेट में अगली गेंद प्रायः फ्री-हिट होती है, जबकि टेस्ट क्रिकेट में फ्री-हिट का प्रावधान सामान्यतः नहीं होता। कमर से ऊपर की फुल टॉस, गलत फ्रंट-फुट स्थिति और निर्धारित सीमा से अधिक बाउंसर इसके प्रमुख कारण हैं। सही निर्णय के लिए पहले गेंदबाज़ के पैर, फिर गेंद की ऊँचाई और अंत में प्रतियोगिता के स्थानीय नियम जाँचें।

गलतफहमी यहीं से शुरू होती है: हर ऊँची गेंद नो-बॉल नहीं होती और हर नो-बॉल पर बल्लेबाज़ को मनमाने ढंग से खेलने की छूट भी नहीं मिलती। आईसीसी, एमसीसी, आईपीएल और घरेलू प्रतियोगिताएँ मूल नियमों के साथ अलग-अलग खेल-शर्तें लागू कर सकती हैं। इसलिए स्कोरबोर्ड का “एनबी” संकेत अंतिम निर्णय बताता है, लेकिन कारण समझने के लिए अंपायर का हाथ, गेंद की स्थिति और आधिकारिक खेल-शर्तें देखना जरूरी है। अधिक भरोसेमंद संदर्भ के लिए मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के क्रिकेट नियम और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के आधिकारिक नियम देखें। आंकड़ों से स्पष्ट है कि छोटी प्रारूप वाली क्रिकेट में अतिरिक्त गेंद और फ्री-हिट का प्रभाव अधिक बड़ा होता है, क्योंकि एक ही ओवर में छह वैध गेंदों की सीमा रणनीति बदल देती है। आईपीएल समाचार पर मैच समीक्षा पढ़ते समय नो-बॉल को केवल गेंदबाज़ की गलती न समझें; बल्लेबाज़ का रन, बाई, लेग-बाई और बाउंड्री भी कुल दंड को बढ़ा सकते हैं।
आगे नियमों को पाँच जाँच-चरणों में बाँटा गया है, ताकि अगली बार टेलीविजन पर दिखने वाला विवाद “अंपायर ने गलत किया” वाली सुविधाजनक अफवाह न रह जाए।
नियमों का त्वरित संदर्भ चाहिए तो यह संक्षिप्त मार्गदर्शिका सुरक्षित रखिए।
चरण 1: क्या नो-बॉल का अर्थ केवल अतिरिक्त रन है?
नो-बॉल ऐसी गेंद है जो गेंदबाज़ी या क्षेत्ररक्षण से जुड़े क्रिकेट नियमों का उल्लंघन करती है। इस पर कम-से-कम 1 पेनल्टी रन मिलता है, गेंद ओवर की छह वैध गेंदों में नहीं गिनी जाती और सीमित प्रारूपों में अगली गेंद फ्री-हिट हो सकती है।
नो-बॉल का मूल आधार एमसीसी का नियम 21 है, लेकिन मैच की खेल-शर्तें उसके प्रभाव को विस्तार देती हैं। यदि गेंद बल्ले से लगकर 4 रन जाती है, तो बल्लेबाज़ के खाते में 4 रन जुड़ सकते हैं और नो-बॉल का 1 रन अलग से जुड़ता है; स्कोरबोर्ड पर कुल 5 रन दिखाई दे सकते हैं। यदि गेंद बल्ले को छुए बिना सीमा पार करती है, तो वह सामान्यतः बाई या लेग-बाई नहीं, बल्कि नो-बॉल के साथ अतिरिक्त रन के रूप में दर्ज होती है। इसी कारण “नो-बॉल मतलब सिर्फ 1 रन” कहना अधूरा है।
अंपायर गेंद को नो-बॉल घोषित करने के बाद सामान्यतः अपना एक हाथ बगल की ओर फैलाता है। वीडियो समीक्षा उपलब्ध होने पर तीसरा अंपायर फ्रंट-फुट, कमर-ऊँचाई फुल टॉस और कैच से जुड़े विवाद देख सकता है, मगर हर स्थानीय प्रतियोगिता में समीक्षा का दायरा समान नहीं होता। आईपीएल में तकनीकी प्रसारण व्यवस्था निर्णय की जाँच कर सकती है, पर मैदान पर अंपायर की प्रारंभिक घोषणा तब तक प्रभावी रहती है जब तक नियमों के तहत उसे बदला न जाए।
- नो-बॉल पर न्यूनतम दंड: 1 रन।
- गेंद वैध गेंदों की गिनती में शामिल नहीं होती।
- सीमित ओवरों में अगली गेंद सामान्यतः फ्री-हिट होती है।
- बल्लेबाज़ को कैच, स्टंपिंग और बोल्ड से आउट नहीं दिया जा सकता।
क्रिकेट स्कोरकार्ड पढ़ने की शुरुआती मार्गदर्शिका
चरण 2: फ्रंट-फुट कैसे जाँचें?
फ्रंट-फुट नो-बॉल तब होती है जब गेंदबाज़ का अगला पैर पॉपिंग क्रीज़ के आगे पूरी तरह उतरता है या रिटर्न क्रीज़ से संबंधित सीमा का उल्लंघन करता है। पैर की कुछ ऊपरी स्थिति निर्णायक नहीं होती; अंपायर यह देखता है कि पैर का कम-से-कम कुछ हिस्सा क्रीज़ के पीछे सुरक्षित क्षेत्र में है या नहीं।
यह वह मामला है जहाँ कैमरा दर्शक को अक्सर बचा लेता है, क्योंकि नंगी आँख से मिलीमीटर का फैसला करना लगभग वैसा ही है जैसे बारिश में सिक्का ढूँढना। गेंदबाज़ का फ्रंट-फुट क्रीज़ की रेखा पर हो सकता है, लेकिन रेखा के पीछे जमीन का हिस्सा सुरक्षित रहना चाहिए; पूरी तरह आगे निकलने पर नो-बॉल होगी। रिटर्न क्रीज़ के बाहर पैर रखने पर भी गेंद अमान्य हो सकती है, खासकर जब गेंदबाज़ कोण बनाकर डिलीवरी करता है। आईसीसी के उच्च-स्तरीय मैचों में निर्णय-प्रणाली पैर के संपर्क और क्रीज़ की स्थिति को अलग-अलग फ्रेम में देखती है।
बैक-फुट नियम भी महत्वहीन नहीं है। गेंदबाज़ का पिछला पैर निर्धारित रिटर्न क्रीज़ के भीतर रहना चाहिए और वह क्रीज़ की रेखा को छू या पार नहीं कर सकता। बाएँ हाथ के तेज गेंदबाज़, दाएँ हाथ के गेंदबाज़ और अलग-अलग रन-अप कोणों में यही गलती अलग दिखाई देती है। प्रशिक्षण में गेंदबाज़ों को क्रीज़ से सुरक्षित दूरी रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि अंतिम कदम पर शरीर का संतुलन बिगड़ना नो-बॉल, अतिरिक्त रन और फ्री-हिट—तीनों का पैकेज दे सकता है।
- फ्रंट-फुट कहाँ उतरा, यह देखें।
- पैर का कोई हिस्सा क्रीज़ के पीछे बचा है या नहीं, जाँचें।
- बैक-फुट रिटर्न क्रीज़ से बाहर तो नहीं गया, देखें।
- प्रसारण में उपलब्ध रिप्ले को अंपायर की घोषणा से अलग न समझें।
- ओवर की गेंद संख्या फिर से जाँचें, क्योंकि नो-बॉल वैध गेंद नहीं होती।
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चरण 3: क्या कमर से ऊपर की गेंद हमेशा नो-बॉल होती है?
कमर से ऊपर की फुल टॉस तब नो-बॉल होती है जब गेंद बल्लेबाज़ के क्रीज़ पर सीधे खड़े होने की अनुमानित स्थिति में कमर से ऊपर पहुँचती है। बाउंसर का नियम अलग है: उसकी ऊँचाई, उछाल और प्रति ओवर अनुमत संख्या प्रतियोगिता की खेल-शर्तों पर निर्भर करती है।
यहाँ दो बातें अलग रखनी होंगी, वरना बहस में नियमों की जगह शोर जीत जाता है। पहली, कमर-ऊँचाई फुल टॉस बिना टप्पा खाए आती है और बल्लेबाज़ के लिए खतरनाक हो सकती है; दूसरी, बाउंसर पिच पर टप्पा खाने के बाद सिर या कंधे के आसपास पहुँचती है। यदि फुल टॉस कमर से ऊपर है, तो सामान्यतः नो-बॉल का संकेत मिलेगा। तेज गेंदबाज़ द्वारा फेंकी गई ऊँची बीमर पर अंपायर बल्लेबाज़ की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है और दोहराव या अनुशासनात्मक कार्रवाई खेल-शर्तों के अनुसार हो सकती है।
बाउंसर की सीमा प्रारूप से बदलती है। ट्वेंटी-20 में आम तौर पर एक ओवर में एक अनुमत बाउंसर, एकदिवसीय क्रिकेट में प्रायः दो और टेस्ट क्रिकेट में लागू खेल-शर्तों के अनुसार अलग सीमा देखी जाती है। सिर के ऊपर से निकलने वाली गेंद को वाइड या नो-बॉल मानने का निर्णय बल्लेबाज़ की सामान्य खड़ी स्थिति, गेंद की दिशा और प्रतियोगिता के नियम पर निर्भर कर सकता है। आईपीएल में तकनीकी समिति और मैच अधिकारियों द्वारा जारी सत्र-विशेष निर्देशों को देखना आवश्यक है; पुरानी क्लिप देखकर 2026 के हर मैच का फैसला करना समझदारी नहीं, बल्कि डिजिटल युग की वही पुरानी लापरवाही है।
खतरनाक और अनुचित गेंदबाज़ी पर अंपायर चेतावनी, गेंदबाज़ी से हटाने या रिपोर्ट की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। यह सामान्य नो-बॉल दंड से अलग अनुशासनात्मक स्तर है।

चरण 4: बल्लेबाज़ को फ्री-हिट और आउट होने से क्या लाभ मिलता है?
फ्री-हिट का अर्थ है कि नो-बॉल के बाद वाली गेंद पर बल्लेबाज़ बोल्ड, कैच, स्टंप्ड या सामान्य हिट-विकेट से आउट नहीं होता। सीमित ओवरों की खेल-शर्तों में यह लाभ मिलता है, जबकि नो-बॉल पर रन-आउट, ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड और हिट द बॉल ट्वाइस जैसे अपवाद अभी भी लागू रह सकते हैं।
फ्री-हिट को “पूरी सुरक्षा” कहना गलत है। बल्लेबाज़ रन लेने दौड़ते समय रन-आउट हो सकता है, जानबूझकर क्षेत्ररक्षण में बाधा डालने पर ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड दिया जा सकता है और गेंद को दूसरी बार मारने की स्थिति में संबंधित नियम लागू हो सकते हैं। यदि नो-बॉल पर बल्लेबाज़ गेंद को खेलकर रन बनाता है, तो वह रन अगली फ्री-हिट गेंद के लिए उपलब्ध अवसर को समाप्त नहीं करता; फ्री-हिट अगली वैध डिलीवरी से पहले की अगली गेंद पर लागू रहती है, भले ही बल्लेबाज़ बदल जाए।
कैच पकड़े जाने पर मामला अधिक पेचीदा दिखता है। नो-बॉल पर पकड़ा गया कैच सामान्यतः विकेट नहीं होता, लेकिन बल्लेबाज़ और दूसरे छोर के खिलाड़ी द्वारा दौड़े गए रन, ओवरथ्रो और बाउंड्री का हिसाब अलग से किया जा सकता है। यदि नो-बॉल बल्ले से लगकर सीमा पार करती है, तो बल्लेबाज़ के रन और अतिरिक्त नो-बॉल रन अलग श्रेणियों में दर्ज होते हैं। यही कारण है कि स्कोरबोर्ड पर 4 रन, 5 रन या उससे अधिक का परिणाम दिखाई दे सकता है।
फ्री-हिट पर बल्लेबाज़ को तीन व्यावहारिक बातें याद रखनी चाहिए:
- जोखिम कम है, लेकिन रन-आउट का जोखिम समाप्त नहीं होता।
- नो-बॉल की दिशा में वाइड होने पर फ्री-हिट अगली गेंद के नियम के अनुसार जारी रह सकती है।
- अंपायर का संकेत और स्कोरर की प्रविष्टि दोनों देखना जरूरी है।
- टेस्ट, एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 में फ्री-हिट की उपलब्धता समान नहीं माननी चाहिए।
बल्लेबाज़ी रणनीति और फ्री-हिट का विश्लेषण
नो-बॉल के बाद सही शॉट चयन और क्षेत्ररक्षण बदलाव समझने के लिए यह विश्लेषण देखें।
चरण 5: आधिकारिक जाँच कैसे करें?
नो-बॉल की पुष्टि के लिए क्रमबद्ध जाँच करें: अंपायर का संकेत, गेंद की वैधता, स्कोरबोर्ड की अतिरिक्त रन प्रविष्टि और प्रतियोगिता की खेल-शर्तें। केवल रिप्ले या दर्शक की प्रतिक्रिया पर्याप्त प्रमाण नहीं है, क्योंकि फ्री-हिट, बाउंसर सीमा और समीक्षा-प्रणाली मैच के प्रारूप के अनुसार बदल सकती है।
एक विश्वसनीय जाँच-पद्धति पाँच स्तरों पर काम करती है। पहले देखें कि अंपायर ने नो-बॉल घोषित की या वाइड; दोनों में अतिरिक्त रन और गेंद की स्थिति अलग होती है। फिर स्कोरकार्ड में “एनबी” या नो-बॉल अतिरिक्त देखें। उसके बाद ओवर की वैध गेंदों की संख्या जाँचें—यदि छह गेंदों के बाद भी अगली डिलीवरी हो रही है, तो किसी वाइड या नो-बॉल ने ओवर बढ़ाया होगा। अंत में मैच के नियम-पत्र को पढ़ें, क्योंकि आईसीसी की मूल रूपरेखा के ऊपर आईपीएल, भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड और टूर्नामेंट आयोजक अतिरिक्त शर्तें रख सकते हैं।
एमसीसी का नियम 21 नो-बॉल की मूल कानूनी संरचना देता है, जबकि नियम 41 अनुचित खेल और खतरनाक गेंदबाज़ी से जुड़े पहलू स्पष्ट करता है। एमसीसी के नियमों का केंद्रीय सिद्धांत है: “नो-बॉल पर गेंद ओवर की वैध गेंद नहीं होती।” इस कथन का व्यावहारिक अर्थ है कि गेंदबाज़ को बिना अतिरिक्त वैध गेंद गिने बल्लेबाज़ी टीम को एक और अवसर देना पड़ता है। विश्वसनीय जानकारी के लिए एमसीसी का नियम 21 और क्रिकेट नियमों का हिंदी संदर्भ देखें।
डेटा विश्लेषक नो-बॉल दर को केवल गेंदबाज़ के अनुशासन से नहीं जोड़ते। रन-अप की लंबाई, पावरप्ले क्षेत्ररक्षण, डेथ ओवर दबाव, पिच की गति और बल्लेबाज़ की क्रीज़ स्थिति भी प्रभाव डालती है। आईपीएल समाचार की मैच समीक्षा में इन कारकों को अलग-अलग पढ़ना अधिक उपयोगी है, क्योंकि 18वें ओवर की नो-बॉल का प्रभाव पारी के तीसरे ओवर की समान गलती से कहीं बड़ा हो सकता है।
सामान्य गलतियाँ कैसे सुलझाएँ
सबसे आम गलती यह मानना है कि नो-बॉल पर बल्लेबाज़ कभी आउट नहीं हो सकता। सही नियम यह है कि कुछ तरीकों से आउट संभव है, जबकि कैच, बोल्ड और स्टंपिंग जैसे सामान्य तरीके लागू नहीं होते। दूसरी गलती यह मानना है कि हर नो-बॉल पर फ्री-हिट मिलेगी; यह मुख्यतः सीमित ओवरों की खेल-शर्तों से जुड़ी सुविधा है, इसलिए टेस्ट मैच की स्थिति अलग हो सकती है।
तीसरी गलती नो-बॉल और वाइड को एक ही समझना है। दोनों अतिरिक्त गेंद दे सकते हैं, लेकिन वाइड का निर्णय गेंद की बल्लेबाज़ की पहुँच से बाहर दिशा पर आधारित होता है, जबकि नो-बॉल पैर, कमर-ऊँचाई फुल टॉस, बाउंसर सीमा या अन्य गेंदबाज़ी उल्लंघन से जुड़ी हो सकती है। चौथी गलती स्कोरकार्ड में कुल 5 रन देखकर यह समझना है कि बल्लेबाज़ ने पाँच रन बनाए; यदि गेंद बल्ले से लगकर सीमा पार गई, तो चार रन बल्लेबाज़ के खाते में और एक नो-बॉल अतिरिक्त हो सकता है।
समस्या सुलझाने के लिए यह सूची अपनाएँ:
- प्रारूप पहचानें: टेस्ट, एकदिवसीय या ट्वेंटी-20।
- अंपायर का संकेत पहचानें: बाँह बगल में फैलना नो-बॉल का संकेत है।
- कारण अलग करें: फ्रंट-फुट, बैक-फुट, बीमर, बाउंसर या अन्य उल्लंघन।
- स्कोरकार्ड में अतिरिक्त रन और बल्लेबाज़ के रन अलग पढ़ें।
- फ्री-हिट का संकेत देखें, लेकिन उसे पूर्ण सुरक्षा न मानें।
- विवाद होने पर मैच के आधिकारिक नियम-पत्र को प्राथमिकता दें।

एक उपयोगी विरोधाभासी निष्कर्ष भी ध्यान रखें: नो-बॉल की संख्या घटाना हमेशा सबसे अच्छा लक्ष्य नहीं है। कुछ गेंदबाज़ जानबूझकर आक्रामक बाउंसर योजना अपनाते हैं, मगर सीमा पार होते ही अतिरिक्त रन और फ्री-हिट का जोखिम रणनीतिक लाभ को नष्ट कर देता है। इसलिए गुणवत्ता का सही माप केवल “कितनी नो-बॉल हुईं” नहीं, बल्कि नो-बॉल के बाद कितने रन, कितने अवसर और कितने दबावपूर्ण ओवर बने—यह संयुक्त परिणाम है।
तेज गेंदबाज़ी की तकनीक और डेथ ओवर योजना
निष्कर्ष
क्रिकेट में नो-बॉल का फैसला पाँच मुख्य संकेतों से समझा जा सकता है: पैर की स्थिति, गेंद की ऊँचाई, बाउंसर की सीमा, अतिरिक्त रन और फ्री-हिट की खेल-शर्त। कमर से ऊपर की फुल टॉस, पॉपिंग क्रीज़ से आगे गया फ्रंट-फुट और अनुमत सीमा से अधिक बाउंसर सबसे महत्वपूर्ण कारण हैं। नो-बॉल पर बल्लेबाज़ को बोल्ड, कैच और स्टंपिंग से सुरक्षा मिल सकती है, लेकिन रन-आउट और कुछ अन्य अपवाद लागू रहते हैं। 2026 में भी सही व्याख्या का सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि प्रसारण संकेत, आधिकारिक स्कोरकार्ड और एमसीसी-आईसीसी नियमों को साथ पढ़ा जाए। केवल सोशल मीडिया की छोटी क्लिप देखकर निर्णय देना वही पुराना आत्मविश्वास है जो नियमों से कम और शोर से अधिक पैदा होता है।
अगली मैच समीक्षा में इन पाँच जाँच-बिंदुओं को लागू करके निर्णय को तथ्य के आधार पर समझें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्रिकेट में नो-बॉल क्या होती है?
उत्तर: नो-बॉल वह अमान्य गेंद है जो गेंदबाज़ी के निर्धारित नियमों का पालन नहीं करती। इसके लिए बल्लेबाज़ी टीम को कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद छह वैध गेंदों में नहीं गिनी जाती। फ्रंट-फुट का क्रीज़ से आगे निकलना, कमर से ऊपर की फुल टॉस और निर्धारित सीमा से अधिक बाउंसर इसके सामान्य कारण हैं। सीमित ओवरों में इसके बाद फ्री-हिट भी मिल सकती है।
प्रश्न: नो-बॉल कैसे पहचानी जाती है?
उत्तर: नो-बॉल पहचानने के लिए पहले अंपायर का संकेत और फिर गेंद की स्थिति देखें। अंपायर सामान्यतः एक हाथ को शरीर से बाहर बगल की दिशा में फैलाकर नो-बॉल घोषित करता है। इसके बाद स्कोरबोर्ड पर अतिरिक्त रन, ओवर की वैध गेंदों की संख्या और फ्री-हिट संकेत जाँचें। वीडियो रिप्ले में फ्रंट-फुट तथा कमर-ऊँचाई फुल टॉस के दृश्य सबसे उपयोगी होते हैं।
प्रश्न: नो-बॉल और वाइड में क्या अंतर है?
उत्तर: नो-बॉल गेंदबाज़ी के उल्लंघन से जुड़ी होती है, जबकि वाइड सामान्यतः बल्लेबाज़ की पहुँच से बाहर दिशा में गई गेंद पर दी जाती है। दोनों में अतिरिक्त रन और अतिरिक्त गेंद मिल सकती है, लेकिन उनके संकेत, कारण और फ्री-हिट प्रभाव अलग हो सकते हैं। नो-बॉल में फ्रंट-फुट, बीमर और बाउंसर सीमा देखी जाती है, जबकि वाइड में गेंद की पार्श्व दिशा और बल्लेबाज़ की पहुँच महत्वपूर्ण होती है।
प्रश्न: नो-बॉल पर बल्लेबाज़ किन तरीकों से आउट हो सकता है?
उत्तर: नो-बॉल पर बल्लेबाज़ रन-आउट, ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड या हिट द बॉल ट्वाइस जैसे सीमित तरीकों से आउट हो सकता है। कैच, बोल्ड और सामान्य स्टंपिंग नो-बॉल पर विकेट नहीं माने जाते। रन-आउट तब भी संभव है जब बल्लेबाज़ फ्री-हिट पर जोखिम लेकर दौड़ता है। इसलिए फ्री-हिट को पूर्ण सुरक्षा समझना नियमों की गलत व्याख्या है।
प्रश्न: क्या हर नो-बॉल के बाद फ्री-हिट मिलती है?
उत्तर: फ्री-हिट सामान्यतः एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 क्रिकेट की खेल-शर्तों में नो-बॉल के बाद मिलती है। टेस्ट क्रिकेट में यह सुविधा सामान्य नियम के रूप में लागू नहीं होती। यदि अगली डिलीवरी वाइड हो जाए, तो प्रतियोगिता की शर्तों के अनुसार फ्री-हिट अगली गेंद पर जारी रह सकती है। सटीक निर्णय के लिए आईसीसी, आईपीएल या संबंधित टूर्नामेंट का नियम-पत्र देखें।
प्रश्न: कमर से ऊपर की गेंद कब नो-बॉल होती है?
उत्तर: बिना टप्पा खाई गेंद बल्लेबाज़ की सामान्य खड़ी स्थिति में कमर से ऊपर पहुँचती है तो उसे सामान्यतः नो-बॉल माना जाता है। यह निर्णय बल्लेबाज़ की क्रीज़ पर खड़े होने की स्थिति और गेंद की ऊँचाई के आधार पर होता है। टप्पा खाई बाउंसर का नियम अलग है और उसके लिए सिर, कंधे तथा प्रति ओवर अनुमत संख्या देखी जाती है। खतरनाक बीमर पर अंपायर चेतावनी या अनुशासनात्मक कार्रवाई भी कर सकता है।
प्रश्न: नो-बॉल के कितने रन मिलते हैं?
उत्तर: नो-बॉल पर न्यूनतम 1 अतिरिक्त रन मिलता है, लेकिन कुल रन इससे अधिक हो सकते हैं। बल्ले से लगी गेंद पर बल्लेबाज़ के रन अलग जुड़ते हैं, जबकि नो-बॉल रन अतिरिक्त श्रेणी में रहता है। उदाहरण के लिए, बल्ले से लगी गेंद सीमा पार करे तो कुल 5 रन मिल सकते हैं—4 बल्लेबाज़ के और 1 नो-बॉल का। बाई, ओवरथ्रो या सीमा के अनुसार कुल संख्या और बढ़ सकती है।